गोंडा, जनवरी 8 -- किसी भी समाज की असली पहचान विषम परिस्थितियों में अथवा संकट की घड़ी में सामने आती है। जब हालात सामान्य होते हैं, तब व्यवस्थाएं अपने तय ढर्रे पर चलती रहती हैं, लेकिन जैसे ही आपदा दस्तक देती है, तब यह साफ हो जाता है कि समाज कितना संवेदनशील, संगठित और मानवीय है। गोण्डा। चाहे प्राकृतिक आपदा हो, स्वास्थ्य संकट हो, अग्निकांड, सड़क दुर्घटना या किसी गरीब परिवार पर अचानक टूटी विपत्ति, संगठन बिना किसी भेदभाव के मानव सेवा में जुट जाते हैं। जिले में बीते वर्षों के अनुभव बताते हैं कि बाढ़, ठंड, महामारी, आगजनी या अन्य आपात स्थितियों में कई बार प्रशासनिक मदद पहुंचने से पहले ही सामाजिक संगठन मौके पर पहुंच जाते हैं। पीड़ितों को तत्काल राहत पहुंचाकर ये संगठन जनहानि और पीड़ा को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ...
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