गोंडा, दिसम्बर 8 -- जिले में स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बनकर निचले पायदान पर खड़ी आशा बहुओं को उचित मानदेय न मिलने से निराशा ही हाथ लग रही है। वह फिक्स मानदेय की मांग पूरी न होने से तंगहाली में जीवन गुजार रही हैं। वेतन वृद्धि, सरकारी कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा की चुनौती से वह लड़ रही हैं। गोण्डा। आशा कार्यकर्त्रियां ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। लेकिन मौजूदा समय में वह खुद कई समस्याओं से जूझ रही हैं। नाममात्र की प्रोत्साहन राशि, वह भी समय से नहीं मिलती। उन पर बढ़ता कार्यभार, सुरक्षा की कमी और सरकारी कर्मचारी का दर्जा न मिलने से वे निराश हैं। हिन्दुस्तान के बोले गोंडा मुहिम में शामिल आशा कार्यकर्त्रिययों ने कहा कि बढ़ती महंगाई में सिर्फ अल्प भुगतान दिया जा रहा हैं। वह भी कई महीने से बकाया है। आशाओं को कोई भी फिक्स मा...