गोंडा, दिसम्बर 17 -- शहरी क्षेत्र की आबादी सवा तीन लाख के पार पहुंच चुकी है, लेकिन तेजी से पसरती नई बस्तियों की हकीकत यह है कि वहां आज भी बांस-बल्लियों के सहारे बिजली सप्लाई की जा रही है। दो दशक पुराने मानकों को धता बताते हुए विभाग ने अस्थायी इंतजाम तो कर दिया, लेकिन खंभों और सुरक्षित लाइन की व्यवस्था न होने से इन इलाकों में हर पल खतरा मंडरा रहा है। गोण्डा। शहर के चारों दिशाओं में बसी नई कॉलोनियों, पूर्वी बाईपास के किनारे, सेानीगुमटी से लेकर, पालीटेक्निक, बहराइच रोड, अयोध्या रोड किनारे विस्तार, स्टेशन रोड से सटे नए प्लॉट् और आवास विकास की पिछली कॉलोनियों व बूढ़ादेवर, गरीबीपुरवा, जानकीनगर, गोण्डा गिर्द, गायत्रीपुरम, राधेपुरवा आदि की कहानी लगभग एक जैसी है। इन इलाकों में बिजली कनेक्शन तो दे दिए गए, लेकिन खंभे उपलब्ध न होने के कारण लंबी-लंबी क...
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