गोंडा, अक्टूबर 12 -- घर-घर सहज बिजली पहुंचाने जैसी स्कीमों से केन्द्र व सूबे की सरकारें लोगों को सहूलियतें देने में जुटी है। इससे पहले भी सौभाग्य योजना से निशुल्क कनेक्शन तक बांटे गए। स्कीमें और योजनाओं के बावजूद बिजली तो किसी तरीके से घरों तक पहुंच गई है लेकिन न तार लगाए गए और न खंभे, जिसकी वजह से न आए दिन मुश्किलें खड़ी होने से साथ लोगों की जान खतरे में है। करीब सवा तीन लाख आबादी वाले शहरी व इसके ईदगिर्द वाले क्षेत्रों में दर्जनों जगह ऐसे जहां खंभें तक नहीं लगे है। गोण्डा। बांस-बल्लियों के सहारे बिजली से शहर की करीब सवा तीन लाख आबादी इन दिनों मौत के साए तले जिंदगी जीने को मजबूर है। बिजली विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि 54 फीडरों और सात उपकेंद्रों से हो रही आपूर्ति का बड़ा हिस्सा आज भी बांस की बल्लियों के सहारे टिका हुआ है। आलम यह है कि ...
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