गोंडा, अगस्त 25 -- कोरोना काल के बाद शहर से लेकर जिले की अन्य सड़कों पर ई-रिक्शा की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। जिले की परिवहन व्यवस्था में ई-रिक्शा धुरी बन चुके हैं। मध्यम और निम्न तबके के लोगों के स्थानीय स्तर पर परिवहन के लिए ई-रिक्शे सर्वसुलभ साधन हैं। गोण्डा। जिले की यातायात व्यवस्था में ई-रिक्शों की भूमिका कतई नजरअंदाज नहीं की जा सकती है। शहर के तंग गलियों से लेकर गांव-गिरांव तक बखूबी ई-रिक्शा चालक लोगों को मुनासिब किराया लेकर पहुंचाते हैं। इसके बाद भी आम लोगों की नजर में ई-रिक्शा चालक खलनायक की भूमिका में नजर आते हैं। सुबह बच्चों को स्कूल पहुंचाने से लेकर लोगों को अस्पताल ले जाते ई-रिक्शा चालक रोजाना देखे जाते हैं। निम्न और मध्यम तबके के लिए ई-रिक्शा पंसदीदा साधन है। हालांकि, कुछ ई-रिक्शा चालाकों की गलती का खामियाजा पूरे वर्ग ...
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