वाराणसी, जनवरी 15 -- वाराणसी। तलवार और सोटियों की खनक बिखेरने वाले गतका खिलाड़ी व्यवस्था की दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर पंजाब की पारंपरिक युद्ध कला वाराणसी के युवाओं में जोश भर रही है, वहीं सिगरा और लालपुर स्टेडियम में अभ्यास के लिए जगह नहीं मिल रही है। जांबाज मैदान पर जीत का परचम लहराते हैं, लेकिन रेल के जनरल डिब्बों के फर्श पर सोकर सफर तय करते है। खिलाड़ियों का कहना है कि न सरकारी नौकरी और न आधुनिक उपकरण मिल पाते हैं। हम 'योद्धाओं' का भविष्य उपेक्षा की भेंट चढ़ रहा है। ----------------- राष्ट्रीय स्तर पर काशी का मान बढ़ा रहे गतका खिलाड़ियों के पास सुविधाएं शून्य हैं। अंतरराष्ट्रीय पदक का सपना देखने वाली प्रतिभाएं बेरोजगारी में अपना हुनर खोने को मजबूर हैं। गतका एसोसिएशन वाराणसी के बैनर तले खिलाड़ियों ने 'हिन्दुस्तान' के साथ अपनी समस्याएं ...