वाराणसी, दिसम्बर 6 -- वाराणसी। बनारस की मिट्टी में मलखंभ की अद्भुत कला को सदियों तक पोषित किया गया, लेकिन आज मलखंभ खिलाड़ी मैदानों से बेदखल हैं। खिलाड़ियों के लिए सिगरा स्टेडियम में जगह नहीं है, कॉलेजों में प्रशिक्षक नहीं है। सबसे बड़ी बात यह कि भविष्य की गारंटी नहीं है। खिलाड़ियों और खेल से जुड़े जानकारों का कहना है कि जान जोखिम में डालकर 'आसमान छूने' वाला मलखंभ खिलाड़ी, आज वित्तीय अभाव और 'चिकित्सा उपेक्षा' का शिकार होकर, धीरे-धीरे दूर हट रहा है। गंभीर सवाल है कि क्या जिला प्रशासन इस गौरवशाली विरासत को आंखों के सामने टूटते देखेगा? लकड़ी के खंभे पर संतुलन साधकर दुनिया को अचंभित करने वाले मलखंभ खिलाड़ियों का हौसला आज डगमगा रहा है। बनारस के स्टेडियमों में इन्हें जगह नहीं मिलती और प्रशिक्षित कोचों के अभाव में यह कला निखर नहीं पाती है। मलखंभ...
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