वाराणसी, जनवरी 20 -- वाराणसी । जिन प्रयोगधर्मी किसानों ने काशी को पहली बार करौंदे के मुरब्बे का स्वाद चखाया, जो आज 42 से अधिक वैरायटी के अचार-मुरब्बा और जेम-जेली बना रहे हैं, उन्हें अपने उत्पादों के लिए प्रभावी मार्केटिंग एवं पैकेजिंग में सपोर्ट की जरूरत है। इस कुटीर उद्यम से जुड़े परिवारों को आधुनिक प्रशिक्षण की जरूरत महसूस हो रही है। वे सब्सिडी के साथ लोन और वैज्ञानिक सपोर्ट चाहते हैं। चाहते हैं कि जलभराव एवं दूसरे अज्ञात कारणों से सूखते जा रहे फलों के बागों को बचाने में उद्यान विभाग उनकी मदद करे। -------------- देश-दुनिया में मशहूर बनारसी व्यंजनों को विविधता की दृष्टि से समृद्ध बनाने में चिरईगांव का विशिष्ट योगदान है। उन्हें प्रयोगधर्मी कहा जाता है। इसलिए कि कभी अपने बागों के अमरूदों को इलाहाबादी अमरूदों की टक्कर में ला खड़ा किया तो कभ...