वाराणसी, जून 21 -- वाराणसी। कोई मोहल्ला सिर्फ नागरिकों की रिहाइश नहीं होता। उससे इतिहास भी लिपटा होता है। अर्दली बाजार भी इतिहास का वह अध्याय है जिसके बिना पुरातन, दिव्य-भव्य काशी का संस्करण अधूरा रहेगा। यहां अंग्रेजी जमाने की अदालतों के अर्दली बसे तो मोहल्ला आबाद हुआ। 123 वर्ष पहले के 'निछद्दम वातावरण में स्वामी विवेकानंद प्रवास करने पहुंचे तो मोहल्ले के इतिहास में अविस्मणीय पृष्ठ जुड़ गया। स्थानीय वाशिंदे चाहते हैं कि स्वामीजी के प्रवास स्थल पर भव्य स्मारक का जल्द से जल्द निर्माण हो। क्षेत्र को अतिक्रमण और जाम से मुक्ति मिले। बनारस के पक्के महाल के बाहर, दो से ढाई सौ वर्ष पहले जिन इलाकों में आबादी बसी, उनमें अर्दली बाजार भी है। कई कॉलोनियों को समेटने वाले इस मोहल्ले के मूल स्वरूप में समय के साथ काफी बदलाव आ चुका है। किसी जमाने का छोटा-स...