वाराणसी, जुलाई 6 -- वाराणसी। वरुणा से मिलने वाले एक परंपरागत नाले के मुहाने पर कभी बाघ प्यास बुझाने आते थे। वहीं जंगली झाड़ियों के झुरमुट में सुस्ताते भी थे। इसलिए उस जगह का नाम पड़ा बघवा नाला। उसी नाम से मोहल्ला आबाद हो गया। नगर निगम के सौजन्य से गंदगी और वरुणा के सौजन्य से मच्छरों को देख अब शायद वहां बाघ भी आना पसंद न करे मगर बाशिंदे हैं कि झेल रहे। पेयजल का गंभीर संकट है। दर्जनों बच्चे जन्म प्रमाणपत्र और आधार न होने के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। बघवानाला के पुराने मोहल्ले में 150 से अधिक मकान हैं। आबादी करीब दो हजार के आसपास है। हाल के वर्षों में मोहल्ले का तेजी से शहरीकरण हुआ है, कई अच्छे मकान और कुछ रिहाइशी कांप्लेक्स बन गए हैं। इनकी आबादी अलग है और शायद पुराने बाशिंदों की तरह परेशान भी नहीं दिखती। मोहल्ले में जुटे नागरिकों ने 'ह...
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