वाराणसी, जुलाई 3 -- वाराणसी। अंग्रेजों के शासनकाल में स्थापित मानसिक रोग अस्पताल पूर्वांचल का इकलौता स्थान है जहां बनारस समेत कई जिलों के रोगी आते हैं। लेकिन संसाधन और स्टाफ आज भी 30 साल पुराने ढांचे के अनुसार ही हैं। यहां न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं, न जरूरी जांच की सुविधा, न ही थेरेपी की व्यवस्था है। मरीजों को पूरी दवाएं नहीं मिलतीं, उन्हें बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। चूंकि रोगियों को यहां आने की लाचारी है मगर लचर सिस्टम के चलते उनकी बीमारी बढ़ जा रही है। तीमारदारों को दोहरा तनाव होता है। पांडेयपुर स्थित मानसिक रोग अस्पताल की स्थापना सन-1809 में हुई। 350 बेड के इस अस्पताल में इस समय तीन सौ से अधिक मरीज भर्ती हैं। उनमें बनारस के अलावा जौनपुर, गोरखपुर, मेरठ सहित अन्य जिलों के भी मरीज हैं। यहां मरीजों और उनके तीमारदारों 'हिन्दुस्तान के साथ बातच...
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