वाराणसी, फरवरी 19 -- वाराणसी। संकटमोचन मंदिर परिसर से आश्रय छिनने के बाद बंदरों को न ठिकाना मिला है, न ही पेट भरने का इंतजाम। लिहाजा, वे कॉलोनियों-मोहल्लों में मुंह मारते हैं। भूख के चलते आक्रामक, उपद्रवी हो गए हैं। कई कॉलोनियों में उनसे त्राहि-त्राहि की स्थिति है। उनमें एक है दुर्गाकुंड की मानस नगर कॉलोनी। बंदर पीड़ित दूसरी कॉलोनियों से मानस नगर इस मायने में अलग है कि यहां हर छोटे-बड़े घर में लोहे की मजबूत जालियां लगी हैं। बंदर सड़कों पर घूमते हैं, वाशिंदे जालियों में कैद रहते हैं। शहर की पुरानी कॉलोनियों में एक मानस नगर की नींव सन-1975 में पड़ी। अब छह लेन की कॉलोनी में 300 मकान हैं। कॉलेजों-विश्वविद्यालयों के वर्तमान और पूर्व प्राध्यापक, सरकारी विभागों में कार्यरत और सेना निवृत्त, उद्यमियों और व्यापारियों की इस कॉलोनी के दु:ख-दर्द की चि...
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