वाराणसी, दिसम्बर 11 -- वाराणसी। एक-दूसरे से जुड़ी 50 से अधिक गलियां। उनमें एक गली में खानपान की ऐसी अड़ी जमी कि पूरे मोहल्ले का नाम चटोरी गली पड़ गया। लोहता बाजार से सटे और घनी आबादी वाले इस मोहल्ले में खाने-खिलाने का पुराना रूतबा अब नहीं रहा। उसके बरक्श अब बाशिंदों की हर सांस में सिर्फ पीड़ा और संघर्ष घुला है। सीवर का पानी घरों में घुसता है। कूड़े के पहाड़ पर मंडराती बीमारियां बच्चों-बुजुर्गों की सांसें छीन रही हैं। कच्ची सड़कों पर अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। विकास ने गली से मुंह मोड़ रखा है। लोहता की चटोरी गली मोहल्ले के एक हजार से अधिक मकानों में 10 हजार से अधिक आबादी रहती है। सभी परिवार करघे और पावरलूम से जुड़े हैं। उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी त्रासदी महसूस होती है। 'हिन्दुस्तान' से बातचीत के दौरान बाशिंदों का दर्द उभरा कि नियमित सफाई और...