वाराणसी, नवम्बर 3 -- वाराणसी। हमसे-आपसे दूर हो चुकी गौरैया तब कोविड काल में घर-आंगन में फुदकती दिखी तो अच्छा लगा था। महसूस हुआ था कि घर का सगुन और सुकून-दोनों लौट आए हैं मगर कोविड के बाद लोगों का वह अपनापन घट गया, सभी आपाधापी वाली दिनचर्या में बिजी हो गए। हम सात वर्षों से इस चिड़िया के संरक्षण में जुटे हैं। सैकड़ों घरों में घोंसलों को देख उत्साह होता है मगर संतोष नहीं क्योंकि समाज, सरकार के स्तर से जिस सहयोग की अपेक्षा है, वह पूरी नहीं हो पा रही है। पक्षी जगत के चार प्राणियों-तोता, कबूतर, कौवा और गौरैया का मानव समाज से गहरा नाता रहा है। कंक्रीट के दिनोंदिन बढ़ते जंगलों के बीच ये चारों ही संकट में हैं। इनके संरक्षण के सामूहिक या व्यापक प्रयासों की भारी कमी है। फिर भी व्यग्र फाउंडेशन के बैनर तले पक्षी प्रेमियों का एक ग्रुप सन-2018 से गौरैया...
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