वाराणसी, दिसम्बर 9 -- वाराणसी। पिसौर (शिवपुर) में लगभग 30 साल पुरानी जर्जर और बदहाल सड़कें अब धूल और कीचड़ की पर्याय बन गई हैं। सीवर लाइन और शुद्ध पानी की सुविधा दूर का सपना है। यहां की हवा में कूड़े की दुर्गंध घुली रहती है। बांस-बल्ली के सहारे झूलते बिजली के तार दुर्घटना की आशंका पैदा करते हैं। अंधेरे में डूबी रातें असुरक्षा का एहसास बढ़ाती हैं। आवारा पशुओं के आतंक ने जीवन कठिन बना दिया है। पिसौर की यह दास्तान महज समस्याओं का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि नागरिकों के दरकते भरोसे का 'दर्दनाक आईना' है। ------- पिसौर (वार्ड नंबर 49) शहर का एक मोहल्ला होने के साथ एक नवविस्तारित वार्ड भी है। यहां विकास की किरण नहीं पहुंची है। 'हिन्दुस्तान' से बातचीत के दौरान रवीन्द्र राजभर, राहुल राजभर, राजेश राजभर ने कहा कि लगभग छह हजार मकान और करीब 20 हजार की आबादी...
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