वाराणसी, फरवरी 10 -- वाराणसी। पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग पर कभी पुरखों ने कुंड बनवाया था, हनुमान मंदिर के बगल में। तब कई छायादार पेड़ भी लगे थे। काल के प्रवाह ने दुर्दिन दिखाया। सरकारी जमीन को पैतृक मान हथियाने वालों की नजर पड़ी। कुंड पाटा जाने लगा। 17 वर्ष पहले सिविल डिफेंस की कोशिशों से कुंड कुदृष्टि से बच गया। 9 वर्ष पहले वीडीए से कुछ व्यवस्थाओं के रूप में 'कलेवा' मिला तो जिंदा हुआ मगर उसे कायाकल्प का अब भी इंतजार है। लंबे समय से पानी सड़ रहा है, गंदगी बढ़ती जा रही है। ----- अर्दली बाजार के सुप्रसिद्ध महाबीर मंदिर के बगल में है लगभग तीन शताब्दी पुराना कुंड। मंदिर की तरह इसे भी महाबीर नाम से पहचान मिली। 'पचकोस' करने वाले श्रद्धालुओं के अलावा सामान्य दिनों में भी लोग यहां दाना-पानी और आराम करते थे। स्थानीय लोग श्राद्ध कर्म के साथ खास पर्वो...