कानपुर, फरवरी 28 -- कानपुर को चमकाने वाले सराफा कारोबार का नूर फीका पड़ने लगा है। देश की आजादी पर 3500 किलो चांदी का भारी-भरकम स्वागत द्वार बनाने वाले सराफा कारोबारियों के सामने अब वजूद बचाने की चुनौती है। लगातार बढ़ते सोने-चांदी के भाव और उस पर एक के बाद एक लग रहे टैक्स से व्यापार की कमर टूट चुकी है। सर्वाधिक राजस्व देने वाले इस कारोबार और इससे जुड़ेकारोबारियों की सुनने वाला कोई नहीं है। व्यापारी कहते हैं कि बाजारों में वाहन पार्किंग की जगह न मिलने से ग्राहकों को खासी परेशानी हो रही है। सराफा कारोबार को सबसे संपन्न कहने वाले उनकी हकीकत के बारे में शायद ही जानते हों। आज बाजार में कई ऐसे कारोबारी हैं, जिनके सामने रोजी-रोटी का संकट है। कभी बाप-दादाओं ने इस कारोबार को चमकाया था, आज कारोबार संकट के दौर से गुजर रहा है। नयागंज बाजार के वरिष्ठ सराफ...
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