भागलपुर, दिसम्बर 12 -- प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज/मणिकांत रमण कटिहार के राष्ट्रीय उच्च पथ किनारे फैला मैकेनिकों का यह पुराना बाजार सिर्फ औजारों की खनखनाहट और इंजन की आवाज नहीं, मेहनतकश हाथों की वह दुनिया है जो हर दिन मशीनों में जान डालते हैं। बरसात में नाले का गंदा पानी दुकानों तक पहुंच जाता है तो धूप में तपती सड़कें काम को और कठिन बना देती हैं। सरकारी सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से दूर, ये छोटे-छोटे गैरेज आज भी संघर्ष और उम्मीद के बीच जूझ रहे हैं। न प्रशिक्षण की सुविधा है, न ढंग की सड़क या नाले की सफाई। फिर भी ये मिस्त्री हर सुबह अपने औजार उठाकर निकल पड़ते हैं- क्योंकि यही उनकी रोजी है, यही उनकी पहचान। यह बाजार बताता है कि असली उद्यमिता वही है, जो कठिन हालात में भी मशीनों को चलाए रखे और उम्मीद को जिंदा रखे। कटिहार जिले के राष्ट्र...
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