भागलपुर, सितम्बर 6 -- प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज/ मणिकांत रमण कटिहार की अनेक बेटियां सपनों के सहारे इंटर तक तो पहुंच जाती हैं, लेकिन आगे की राह उनके लिए बंद गली जैसी बन जाती है। क्षेत्र में तकनीकी व व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों की कमी उनकी प्रगति रोक देती है। डॉक्टर, अफसर या शिक्षक बनने का अरमान समय से पहले ही बुझ जाता है और मजबूरी में उन्हें चूल्हा-चौका या कम उम्र की शादी का बोझ उठाना पड़ता है। यह स्थिति केवल उनकी व्यक्तिगत हार नहीं है, बल्कि पूरे समाज के भविष्य को अधूरा कर देती है। बेटियों की शिक्षा और हुनर में बाधा डालना मानो विकास की गति रोकना है। अगर उन्हें उच्च शिक्षा व प्रशिक्षण की सुविधाएं मिले तो वे अपने सपनों को न सिर्फ पूरा कर पाएंगी बल्कि समाज और देश को भी नई दिशा देंगी। आजादी के 79 साल बाद भी बिहार के कटिहार जिले की बेटियां ...
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