भागलपुर, मई 21 -- कटिहार के गांवों में सुबह की रौशनी अब सिर्फ सूरज नहीं, महिलाओं के हौसलों से भी फैलती है। साड़ी के पल्लू से पसीना पोंछती ये महिलाएं अब सिर्फ घर संभालने वाली नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सपनों को अपने हाथों से आकार देने वाली उद्यमी बन रही हैं। कभी रसोई में लड्डू बनाते हुए, तो कभी खेत की मेड़ पर बीज बोते हुए, ये खुद को और अपने परिवार को बेहतर कल देने में जुटी हैं। संसाधन कम हैं, प्रशिक्षण अधूरा है, लेकिन इरादे फौलादी हैं। इन्हें चाहिए बस थोड़ा सहयोग। फिर ये महिलाएं अपनी दुनिया खुद बदल देंगी। हिन्दुस्तान के साथ संवाद के दौरान प्रशिक्षण ले चुकी महिलाओं ने अपनी बात रखी। 15 हजार से अधिक महिलाएं जीविका समूह से जुड़कर करती हैं कार्य 70 प्रतिशत महिलाएं घरेलू उत्पाद बनाकर गांव के भीतर बेच रहीं 80 फीसदी महिलाओं के नाम नहीं है भूमि रिकॉर्ड,...
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