भागलपुर, जनवरी 26 -- -प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज शहर और ग्रामीण इलाकों की गलियों में इन दिनों एक नया कारोबार तेजी से फैल रहा है निजी पानी प्लांट। कभी जो आरओ या मिनरल वाटर प्लांट चुनिंदा मोहल्लों तक सीमित थे, आज वे हर बस्ती, हर चौक और हर गली में नजर आने लगे हैं। पहली नजर में ये प्लांट लोगों की प्यास बुझाने का साधन लगते हैं, लेकिन भीतर झांकें तो यही प्लांट आम लोगों की सेहत के लिए एक खामोश खतरे में बदलते जा रहे हैं। सरकार की नल-जल योजना का सपना था कि हर घर तक शुद्ध और सुरक्षित पेयजल पहुंचे, ताकि किसी को पानी खरीदने की जरूरत न पड़े। लेकिन हकीकत इससे अलग है। कई इलाकों में नल से आने वाला पानी बदबूदार है, कहीं मटमैला तो कहीं आयरन की अधिकता से लाल-पीला। ऐसे में लोगों के सामने सवाल नहीं, मजबूरी खड़ी हो जाती है। मजबूरी, जो उन्हें निजी पानी प्लांट क...