भागलपुर, जनवरी 22 -- प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज कटिहार के ग्रामीण अंचलों में भोजन अब सिर्फ भूख मिटाने का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह धीरे-धीरे सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है। गांव की गलियों, हाट-बाजारों और कस्बाई दुकानों में बिक रहा रोज़मर्रा का सामान भरोसे के नाम पर बेचा जा रहा है, लेकिन उसके भीतर मिलावट का जहर घुला हुआ है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि अब यह समस्या केवल इंसानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पशुओं के आहार तक पहुंच चुकी है। कुछ वर्ष पहले तक गांवों में भी खाद्य सुरक्षा कानून का असर दिखता था। प्रखंड स्तर पर खाद्य निरीक्षक अचानक दुकानों पर पहुंचते, मिठाई, तेल, मसाले, दूध और किराना सामग्री के नमूने लेते और जांच के लिए प्रयोगशाला भेजते थे। दुकानदारों में डर रहता था कि कहीं गड़बड़ी पकड़ी गई तो जुर्माना और कानूनी कार्र...