भागलपुर, नवम्बर 24 -- विकास की चौखट पर खड़े भारत में भी कुछ गांव ऐसे हैं, जो आज भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। कुरसेला प्रखंड का गोबराही दियारा उन्हीं में से एक है। करीब पांच हजार की आबादी वाला यह इलाका आज भी सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों से मरहूम है। यहां की जिंदगी नाव पर सवार होकर गुजरती है। बाढ़ आए या सुखाड़ हर हाल में गंगा की धाराओं को पार करना यहां के लोगों की मजबूरी है। गोबराही दियारा तक पहुंचने का कोई सड़क संपर्क नहीं है। बाढ़ के दिनों में यह इलाका टापू की शक्ल अख्तियार कर लेता है। नाव ही एकमात्र सहारा है। सुखाड़ के समय भी गंगा की दो धाराओं को पार करना पड़ता है। अस्पताल तक पहुंचना हो या बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रखंड मुख्यालय भेजनाहर बार लोगों को जान जोखिम में डालकर तीन-चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है और फिर ना...