भागलपुर, जनवरी 31 -- -प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, मोना कश्यप कटिहार शहर की सड़कों पर दौड़ते ऑटो सिर्फ यात्रियों को मंज़िल तक नहीं पहुंचाते, बल्कि सैकड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी भी इन्हीं पहियों पर टिकी है। लेकिन विडंबना देखिए-जिन सड़कों से उनका जीवन चलता है, वही सड़कें आज उनके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन चुकी हैं। शहर में ऑटो और टेंपो चालकों के लिए समुचित पार्किंग व्यवस्था का न होना अब सिर्फ एक प्रशासनिक कमी नहीं, बल्कि एक मानवीय संकट का रूप ले चुका है। सुबह होते ही ऑटो चालक घर से यह सोचकर निकलते हैं कि आज सवारी मिलेगी या नहीं, और मिलेगी तो कहीं पुलिस चालान तो नहीं काट देगी। शहर के किसी भी प्रमुख चौक, बाजार, अस्पताल या बस स्टैंड के आसपास ऑटो के लिए कोई तय पार्किंग स्थल नहीं है। मजबूरी में चालक सड़क किनारे वाहन खड़ा करते हैं, जिससे यातायात बाध...