एटा, मई 2 -- स्कूलों तक बच्चे वैन, ई रिक्शा से पहुंच रहे है। जिस तरह से बच्चों को स्कूल तक लाने ले जाने का काम किया जा रहा है वह क्षमता से तीन गुने अधिक है। कुछ वैन और ई रिक्शा तो इस तरह से भरे होते हैं कि बच्चों का सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। अभिभावकों से मनमाने पैसा लेने के बाद भी बच्चे घंटों स्कूली वैनों में परेशान रहते हैं। चाहकर भी अभिभावक कुछ कह नहीं पा रहे है। जिम्मेदार अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। इसके लिए कुछ महिलाओं से बोले एटा के तहत बात की तो उन्होंने खुलकर अपनी बात कहीं। बच्चों को बैठाने के लिए एक सीमा होना बहुत जरूरी है। जिले में सैकड़ों की संख्या में स्कूल संचालित हैं। अधिकांश बच्चों को लाने और ले जाने के लिए अभिभावकों ने स्कूली वैन और ई रिक्शा को हायर किए हैं। सुरक्षित स्कूल पहुंचाने के लालच में बच्चों को भेजा...
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