एटा, दिसम्बर 25 -- उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर हो या अयोध्या में रामलला का मंदिर या फिर अमेरिका के गिरजाघरों में सजावट के लिए लगने वाली घंटियों का निर्माण करने वाले कारीगरों को सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ही नहीं है। ना जाने कितनी सरकारें बदल गई, लेकिन किसी भी सरकार की ओर से इन कामगार कारीगरों की दुनिया नहीं बदली। ना तो गैस मिल पाई ना ही आधुनिक तरीके की कोई भट्टियां। जो लोग कारखाना चला रहे है उनके सामने अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं। बोले एटा के तहत आयोजित संवाद में कारोबारियों की अपनी चुनौतियों के बारे में खुलकर बताया। देश विदेशों तक घुंघरू घंटी की आवाज को पहुंचाने करीब छह से आठ हजार तक कारीगर जलेसर में काम करते है। छोटी भट्टियां घरों में लगा रखी है। एक भट्टी पर काम करने के लिए कम से कम चार लोगों की जरुरत होती ह...
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