उरई, फरवरी 15 -- उरई। उरई शहर को जो रोज अपनी मेहनत से चमका रहे हैं, उन्हीं की जिंदगी अंधेरे में है। सफाई के एवज में न तो बेहतर मेहनताना मिलता है और न ही संसाधन। ये बिना सेफ्टी किट के नाले और नालियों में उतरते हैं। दस्ताने और जूते पुराने व फटे हैं। सफाई के दौरान हाथ-पैर कांच और पत्थर से घायल हो जाते हैं। 10 साल से वर्दी नहीं मिली। पीएफ का पैसा तक खाते में नहीं आ रहा है। पर इनकी सुनने वाला कोई नहीं। मोहल्लों में फैले कूड़े कचरे से लेकर छोटे-बड़े नालों में जमा गंदगी उठाकर शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने में दिन रात जुटे रहने वाले सफाई कर्मियों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। सैलरी के अलावा न तो इन्हें एरियर मिलता है और न ही वर्षों से जमा कराए गए बांड का एक धेला। इसके अलावा 10 साल से स्थाई कर्मियों को सर्दी से बचाव के लिए वर्दी भी नहीं दी गई। सफाई...
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