उन्नाव, फरवरी 26 -- शादी हो या फिर कोई अन्य कार्यक्रम, अगर खाना लजीज हो तो हर कोई तारीफ किए बिना नहीं रह पाता है। बिना हलवाइयों के मांगलिक कार्यक्रम अधूरा ही रहता है, लेकिन हलवाइयों का अपना दर्द है। दूसरों को लजीज भोजन कराने वाले इन हलवाइयों को सही पारिश्रमिक नहीं मिल पाता है। जिले में बड़ी संख्या में हलवाई हैं। इसके बावजूद यह लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इसका मुख्य कारण काम में कमी और पर्याप्त पारिश्रमिक न मिलना है। ऐसे में हलवाई हताश हैं। आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान से हलवाई कारीगरों ने अपना दर्द साझा किया। सभी ने एकसुर में कहा कि उन्हें भी पर्याप्त पारिश्रमिक दिलाने की व्यवस्था की जाए, जिससे वह परिवार का भरण पोषण कर सकें। जिले में मौजूदा समय करीब दो हजार से अधिक हलवाई कारीगर हैं। इनमें काफी संख्या में ऐसे कारीगर हैं, जो बीते कई दश...
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