उन्नाव, मार्च 10 -- अंग्रेजों और मुगलों के दांत खट्टे करने वाले बंजारा समाज की ओर सरकार का ध्यान ही नहीं जा रहा है। ये लोग जिले में इधर-उधर डेरा डालकर औजार बनाने के हुनर से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। सर्दी, गर्मी और बारिश में सड़क के फुटपाथ पर इनका घर रहता है। खुला आसमान और धरती ही इनका बिछौना होता है। इनके बच्चों को शिक्षा का 'क' क्या होता है, पता ही नहीं है। आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान से बंजारा सामाज के लोगों ने अपनी पीड़ा साझा की। इस दौरान सभी ने एकसुर में कहा कि कब तक खुले छत के नीचे जिंदगी गुजारेंगे। सरकारी आवास का लाभ मिलना चाहिए। उन्नाव के अलग-अलग इलाकों में करीब पांच सैकड़ा से अधिक बंजारों ने पांच दशक से डेरा डाल रखा है। सड़कों पर फुटपाथ के अलावा जहां जगह मिली, वहां खुद और परिवार के लिए बसेरा बना लिया। आर्थिक तंगी के चलते ह...
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