उन्नाव, फरवरी 18 -- गेस्ट हाउस और मैरिज हॉल संचालक नियमों की धार से कटकर चोटिल हो रहे हैं। नियमों और लाइसेंस के फेर ने ऐसा फंसाया है कि शादियों की रौनक बढ़ाने वाले खुद रोनी सूरत लिए नजर आते हैं। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान से गेस्ट हाउस संचालकों ने अपनी पीड़ा साझा की। सभी ने एक सुर में कहा कि नगर पालिका उनसे टैक्स तो वसूलती है, लेकिन गेस्ट हाउस के बाहर साफ सफाई उन्हीं को करानी पड़ती है। तमाम नियमों का फंदा लगाकर गेस्ट हाउस को नोटिस थमा दिया जाता है। गेस्ट हाउस संचालकों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए। जिले के लगभग 40 फीसदी मांगलिक कार्यक्रम अब गेस्ट हाउस से होने लगे हैं। शहरी इलाके में यही आंकड़ा 90 फीसदी पहुंच जाता है। नगर क्षेत्र में 130 से अधिक ऐसे गेस्ट हाउस और रिजॉर्ट हैं, जिनकी न तो लो प्रोफाइल है और न ही सामाजिक गतिविधियों की मेन स्ट्रीम से ...
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