इटावा औरैया, फरवरी 18 -- हर के बर्तन बाजार का कारोबार धीरे-धीरे सिमटने लगा है। पहले बाजार की दो गलियों में सौ से अधिक दुकानें बर्तन की थीं। लेकिन अब महज 70 ही बची हैं। कई बर्तन के कारोबारियों ने अन्य काम कर लिए हैं। बर्तन व्यापारी मनसुख बताते हैं कि इसका कारण बाजार में सुविधाओं का नदारद होना भी है। दिन भर बाजार में जाम लगता है। पार्किंग न होने से ग्राहक वाहन कहां खड़ा करें इसके लिए परेशान होते हैं। वाहन चोरी न हो जाए इसकी भी चिंता उन्हें सताती है। धर्मेंद्र बताते हैं कि पीतल, तांबे और कांसे के बर्तनों में होने वाली घिसाई पर आने वाला खर्च लगातार बढ़ता जा रहा। बिजली कटौती भी यह खर्च बढ़ाती है। आशीष कुमार कहते हैं कि लोगों ने इन बर्तनों को या तो टाल पर रख दिया या फिर इन्हें केवल शादी समारोह तक ही सीमित कर दिया। रही सही कसर स्टील ने पूरी कर दी। ...
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