आगरा, सितम्बर 23 -- अस्पताल में मरीजों की सेवा और बाद में घर का कामकाज। भला एक जान इतना काम कैसे कर सकती है। जहां पुरुष अपनी नौकरी या व्यवसाय से थके-हारे घर लौटते हैं। वहीं हमारी नर्सें अस्पताल के बाद पति, सास-ससुर और बच्चों का खानपान, देखभाल को बड़ी आसानी से कर लेती हैं। एक साथ दो बड़ी जिम्मेदारियां संभालने वालीं नर्सें इसीलिए शक्ति स्वरूपा हो चली हैं। हालांकि कई दुश्वारियों से भी इनका सामना होता रहता है। आपके अखबार 'हिन्दुस्तान' के साथ संवाद में उन्होंने बताया कि उन्हें सेवा से ही शक्ति मिलती है। आम तौर पर एक नर्स 8 घंटे की ड्यूटी करती है। अस्पताल की तीन शिफ्टों में शेड्यूल के हिसाब से काम करती हैं। जबकि सप्ताह में एक रात 12 घंटे की ड्यूटी भी शामिल है। इसमें वह ओपीडी से लेकर ऑपरेशन थियेटर तक डॉक्टरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करती ...
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