आगरा, अक्टूबर 5 -- ''यह कोई भगवान का मंदिर नहीं है, लेकिन इन्हीं के त्याग, साधना, संघर्ष और आत्मोत्सर्ग के कारण ही भारत में मंदिर है।'' ताज नगरी की कलाकृति कल्चर एंड कन्वेंशन सेंटर ग्राउंड के शिव आवरण मंडपम की गैलरी में लिखे इस वाक्य की सार्थकता जाणता राजा महानाट्य के रूप में दिखने जा रही है। लगभग 20 फीट लंबे मोटे अक्षरों में लिखे इस वाक्य के नीचे लगे दाहर, बच्चा रावल, आदि गुरु शंकराचार्य, रामानंदचार्य, पृथ्वीराज चौहान, माधवाचार्य, रामानुजाचार्य, बल्लाभाचार्य, छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराजा छत्रपाल, श्री गुरु गोविंद सिंह, वीर वंदा बैरागी, केशव बलिराम हेडगेवार, माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर श्री गुरुजी, अशोक सिंघल के चित्र लगे हैं। भारत की संस्कृति, सभ्यता, परंपरा, शौर्य, साहस, आध्यात्म, शांति, एकता, विस्तार और बल को सर्वश्रेष्ठ मानने वाली दे...
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