आगरा, मार्च 17 -- आगरा। सनातन संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। यही वजह है कि गाय के दूध की तुलना अमृत से होती है। गाय की सेवा को ईश्वर की सेवा माना जाता है। इसके बाद भी ये हैरत वाली ही बात है कि शहर में बड़ी संख्या में गोवंश आज भी बेसहारा घूम रहा है। इलाज के लिए जो इंतजाम हैं। वो नाकाफी नजर आते हैं। हालांकि ऐसी निराश्रित गायों की सेवा करने के लिए 200 से ज्यादा युवाओं की टोली खड़ी हो गई है लेकिन उनके पास भी संसाधनों और सहयोग का अभाव है। टीम के पास टिर्री वाली एक एंबूलेंस भी हैं। जिसकी मदद से वो एक हजार से भी ज्यादा गोवंशों का रेस्क्यू कर चुके हैं। संवाद कार्यक्रम में युवाओं ने गोवंशों की दुर्दशा पर चिंता जाहिर की। कहा कि गायों की सुरक्षा और सेवा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाने की जरूरत है। योगी सरकार में गायों की सुरक्षा के ...
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