अमरोहा, मई 9 -- सरकारी एंबुलेंसों के चालक महज थोड़ी सी पगार में परिवार से दूर रहकर मरीजों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराने की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। कहने को तो एंबुलेंस चालकों की आठ घंटे की ड्यूटी रहती है। मगर असलियत में इन पर 12 घंटे ड्यूटी करने की मजबूरी है। इसका ओवरटाइम भी इन्हें नहीं मिल रहा है। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की सरपट दौड़कर जिम्मेदारी उठाने वाले एंबुलेंस चालक बंधुआ मजदूर बनकर रह गए हैं। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से 102 व 108 समेत एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट सिस्टम वाली सरकारी एंबुलेंसों का बड़ा महत्व है। एंबुलेंसों के पायलट दिन-रात बिना थके मरीजों, गर्भवती महिलाओं और घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराने की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। इस बीच मरीजों की सेहत के पैरोकारों को खुद अपनी समस्याओं के समाधान की लंबे समय से दरकार ...
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