नई दिल्ली, फरवरी 7 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बैंक खातों पर मनमाने तरीके से रोक लगाने की कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि जब खाताधारक न तो आरोपी हो और न ही जांच में संदिग्ध, तब उसके लेन-देन पर पूर्ण या असंगत रोक लगाना संविधान के तहत प्रदत्त आजीविका और व्यवसाय की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने कहा कि बिना पर्याप्त विचार के खातों पर रोक निर्दोष इकाइयों के रोजमर्रा के कारोबार को ठप कर देती है और उनकी व्यावसायिक साख को गंभीर नुकसान पहुंचाती है। अदालत ने यह टिप्पणी मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका में केन्द्र सरकार और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केन्द्र (आई4सी) को भारतीय स्टेट बैंक और एचडीएफसी बैंक को दिए गए खातों पर...