हापुड़, अगस्त 12 -- गंगा की तलहटी में चार दिन से बाढ़ की विभिषिका के बीच एक फार्म हाउस पर रह रहे मजदूर ने बीमार पत्नी को चिकित्सक के पास ले जाने के लिए कोई साधन नहीं था। बेबस होकर जब दर्द से पत्नी चीख रही थी वो अपने साथ लेकर चल दिया। एक किलोमीटर तक बूढ़ी गंगा में बह रहे बाढ़ के पानी में उसने पत्नी को अपने कंधे पर बैठा लिया। पति द्वारा पत्नी को सुबह-सुबह कंधे पर बैठकर ले जाते दूर स्थित एक फार्म हाउस पर देखने वालों ने तस्वीर मोबाइल में खींच ली। चार दशक बाद गढ़ की आबादी ने गंगा का विकराल रुप देखा है। रौद्र गंगा तीन दिनों से गांवों में घुस चुकी है। जबकि हजारों हैक्टेयर जंगल जलमह्न हुआ पड़ा है। ऐसे में न जाने हजारों परिवार आज भी गंगा के बाढ के पानी के बीच जीवन बिता रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि सभी गांवों में ग्रामीणों के आवागमन के लिए नाव लग...