पटना, जुलाई 16 -- बुद्ध स्मृति पार्क संग्रहालय एवं इन्टैक पटना चैप्टर के बैनर तले में बौद्ध मूर्तिशिल्प विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। अध्यक्षता करते हुए संग्रहालय के पूर्व निदेशक डॉ. उमेश चन्द्र द्विवेदी ने कहा कि बिहार का सैभाग्य है कि सिद्धार्थ को बुद्धत्व की प्राप्ति इसी धरती पर हुई थी। उनके अनुसार करीब दो हजार वर्ष पूर्व गांधार और मथुरा में बुद्ध की मूर्ति निर्माण कार्य शुरू हुआ था। डॉ. द्विवेदी ने बौद्ध प्रतिमा निर्माण के क्रमिक विकास को रेखांकित करते हुए दर्जनों बौद्ध मूर्तियों का परिचय कराया। पटना विवि के प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. जयदेव मिश्र ने कहा कि मूर्तियों की जानकारी के लिए बौद्ध साहित्यों का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बिनयतोष भट्टाचार्य ने सबसे पहले बौद्ध मूर्तिश...
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