वाराणसी, जनवरी 9 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। बीएचयू में नियम बनाम परम्परा की लड़ाई में अंततः नियम को मान्य किया गया। छात्र भाष्करादित्य त्रिपाठी को नौ महीने बाद गुरुवार को हिंदी विभाग से पीएचडी में प्रवेश दिया गया। गौरतलब है कि हिन्दी विभाग में ईडब्ल्यूएस श्रेणी में वेटिंग की सीटों को भरने के वरियता क्रम में पहले आने पर अर्चिता सिंह ने दावेदारी की थी पर समय पर ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र न बन पाने के कारण विवाद खड़ा हो गया। पता चला कि अर्चिता ने बिना ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र के आवेदन कर दिया गया था और अंतिम समय में विभाग द्वारा अंडरटेकिंग तो लिया गया पर प्रवेश का लिंक रोक दिया गया। अगले क्रम में भाष्करादित्य त्रिपाठी को लिंक भेजा जाना था। जब 24 घंटे बीत जाने पर लिंक नहीं भेजा गया तो इसे लेकर विवाद बढ़ गया। अर्चिता और भाष्करादित्य ने विरोध किया...