दरभंगा, जून 13 -- दरभंगा। कबीर एवं नागार्जुन के साहित्य में लोक दर्शन का अर्थ लोक जीवन से है। बिहार के महत्वपूर्ण आंदोलनों में नागार्जुन की अहम भूमिका रही है। उन्होंने युग निर्माण और किसान मजदूर के हक में अपनी लेखनी को आधार बनाया। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में नागार्जुन चेयर के तत्वावधान में नागार्जुन जयंती के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष सह मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने ये बातें कही। कबीर और नागार्जुन के साहित्य में लोक दर्शन विषयक संगोष्ठी में बीज वक्ता के रूप में प्रो. सिंह ने कहा कि सामंती व्यवस्था, स्वार्थ जनित राजनीति के प्रति नागार्जुन ने अपनी आवाज बुलंद की। अपने साहित्य के माध्यम से उन्होंने महिलाओं के जीवन संघर्ष और पीड़ा को यथार्थ रूप से अपनी रचनाओं में व्यक्त किया है। ललित कला...
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