पटना, जनवरी 1 -- बिहार की पांच दर्जन से अधिक नदियों का अस्तित्व खतरे में है। जीवनदायिनी ये नदियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गयी हैं। कई नदियां अतिक्रमण के कारण अंतिम सांसें ले रही हैं। यही नहीं जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण, बेहतर प्रबंधन का अभाव और सरकारी तंत्र की लापरवाही के कारण ये बरसाती नदियां बनकर रह गयी हैं। ये हालात बिहार के किसी एक क्षेत्र का नहीं, बल्कि हर तरफ के हैं। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की बात करें तो कोसी, सीमांचल और पूर्वी बिहार के जिलों में बहने वाली एक दर्जन से अधिक नदियों के वजूद पर संकट है। सहरसा जिले में कोसी की सहायक नदी तिलावे और सुरसर नदी का वजूद मिटने के कगार पर है। सिमरी बख्तियारपुर के धनुपुरा में कमला बलान, सिमरटोका नदी, दह कोसी उपधारा, आगर नदी पूरी तरह से सूख गई है। अररिया जिले के रानीगंज प्रखंड से गु...