विजय वर्मा लखनऊ, जनवरी 29 -- राजधानी व एनसीआर में रियल एस्टेट के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ गया है। अब बिल्डर फ्लैट, दुकान और पारंपरिक ऑफिस की जगह ऐसे मॉडल लेकर आ गए हैं जो आधुनिक बताए जा रहे हैं लेकिन कानून की कसौटी पर फिट नहीं बैठते। को-वर्किंग स्पेस, होटल रूम पूलिंग और बड़े ऑफिस स्पेस यह तीन मॉडल ऐसे हैं, जिन पर बिल्डरों ने तेजी से काम शुरू किया है लेकिन इन तौर तरीकों ने यूपी रेरा की नींद उड़ा दी है। क्योंकि रेरा कानून में इन पर नियंत्रण की कोई व्यवस्था ही नहीं है। इस मामले में रेरा के सचिव महेन्द्र वर्मा ने 12 जनवरी को एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार को पत्र भेजकर उनसे उनका अभिमत मांगा है। ताकि इस पर आगे कार्यवाही की जा सके।क्या है को-वर्किंग स्पेस का खेल को-वर्किंग स्पेस का मतलब साझा दफ्तर। इसमें कोई एक कंपनी पूरा ऑफिस नहीं लेती, बल्कि स...