लखनऊ, फरवरी 2 -- केजीएमयू लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने दिल के वॉल्व की गंभीर बीमारी से पीड़ित दो बुजुर्ग को नया जीवन देने में कामयाबी हासिल की है। विभाग के डॉ. शरद चन्द्रा, डॉ. गौरव चौधरी और डॉ. अखिल शर्मा ने बिना बाईपास सर्जरी वॉल्व बदलने में सफलता हासिल की है। ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व इम्प्लांटेशन (टीएवीआई) प्रक्रिया को अपनाकर बुजुर्गों को बड़े ऑपरेशन के दर्द से बचाया है। सोमवार को लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने पत्रकारों से बुजुर्गों के इलाज की जानकारी साझा की। पहले बुजुर्ग की उम्र करीब 84 वर्ष है। उनके वॉल्व में खराबी थी। दिल कम पंप कर पा रहे थे। बुजुर्ग को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, पेशाब में खून आने और दोनों फेफड़ों में पानी भरने की समस्या भी थी। डॉ. शरद चन्द्रा ने बताया कि ऐसी दशा में बाईपास सर्जरी कर वॉल्व बदलना मु...