जमशेदपुर, नवम्बर 17 -- साकची बोधि सोसाइटी के मैदान में चल रहे बाल मेले में रविवार को बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम पर महत्वपूर्ण संगोष्ठी हुई, जिसमें शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बच्चों के अधिकार, सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एसएन पाठक ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं, इसलिए उनकी नींव मजबूत करना मौलिक जिम्मेवारी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक पतन का मूल कारण नैतिक शिक्षा की उपेक्षा है। मोरल साइंस की पढ़ाई हो और उसमें 75 फीसदी अंक लाना अनिवार्य किया जाए। पाठक ने बाल श्रम को खतरनाक बताते हुए कहा कि झारखंड के माइंस क्षेत्रों में बच्चों के काम करने की घटनाएं चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि कानून बने हुए हैं, जरूरत है उन्हें सख्ती से लागू करने की। च...