रामगढ़, नवम्बर 13 -- रामगढ़, एक प्रतिनिधि। एक समय था जब बच्चे मिट्टी की गुड़िया, लकड़ी की ट्रेन, बांस की पिस्तौल और टीन के सिपाही बनाकर घंटों खेलते थे। खेतों में मिट्टी के घर बनाना, लट्टू घुमाना, गिल्ली-डंडा खेलना और घर के आंगन में कंचे खेलना ही उनके बचपन की सच्ची दुनिया थी। न मोबाइल था, न रिमोट से चलने वाली कारें - लेकिन कल्पनाशक्ति और खुशियों की कोई कमी नहीं थी। आज के दौर में वही बचपन अब तकनीक की चमक में ढल गया है। बच्चों के खिलौनों की दुनिया अब मिट्टी और लकड़ी से निकलकर रोबोटिक, इलेक्ट्रॉनिक और सेंसर बेस्ड गैजेट्स तक जा पहुंची है। रामगढ़ के बाजारों में बाल दिवस से पहले खिलौनों की दुकानों पर रौनक है। लेकिन इन रैक पर अब वह मिट्टी के जानवर या लकड़ी के घोड़े नहीं दिखते, जिनसे कभी बच्चों की दुनिया बसती थी। अब वहां चमचमाती रिमोट कंट्रोल कारे...