नई दिल्ली, जनवरी 15 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि देशभर में लंबित सेवा संबंधी विवादों की बड़ी संख्या बार-बार होने वाले मुकदमेबाजी से बढ़ी है। अदालत ने आगे कहा कि न्यायपालिका को सेवा नियमों की व्याख्या इस तरह से करनी चाहिए जो चयन प्रक्रिया के मूल उद्देश्य की पूर्ति करे। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की कि आरक्षित सूची में शामिल उम्मीदवार सूची की वैधानिक वैधता समाप्त होने के बाद नियुक्ति के अधिकार का दावा नहीं कर सकते हैं। पीठ ने कहा कि न्यायपालिका में अपने संयुक्त अनुभव के आधार पर, हम यह कह सकते हैं कि देशभर में लंबित सेवा-संबंधी विवादों की एक बड़ी संख्या लंबी और बार-बार होने वाली मुकदमेबाजी से और भी जटिल हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप देशभर में कई उम्मीदवारों के ल...
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