बांदा, दिसम्बर 4 -- बांदा, कार्यालय संवाददाता। पुलिस कस्टडी से हथकड़ी छुटाकर भागने के मामले में दोषी बर्खास्त सिपाही के नियुक्ति के समय का दर्ज एड्रेस न मिलने पर इसे खोजने में जीआरपी को 12 साल लग गए। इसके बाद लोगों से कड़ी से कड़ी जोड़कर पूछताछ करते करते पुलिस किसी तरह बर्खास्त सिपाही के बेटे तक कानपुर पहुंच गई। जिसके बाद उसके सही पते की कानपुर में तस्दीक हो पाई। यही कारण रहा, जिससे फैसला आने में 18 साल लग गए। जब कि दूसरा बर्खास्त सिपाही लगातार न्यायालय में पेश होता रहा। जीआरपी थानाध्यक्ष शिवबाबू ने बताया कि वर्ष 2007 में कानपुर नगर के सेन पश्चिम पारा के तिरमा गांव निवासी सिपाही सुरेश तिवारी व कानपुर नगर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के शिवनगर नई बस्ती निवासी सिपाही विजय पाल मुल्जिम वसीम खां को हमीरपुर से गैंगस्टर कोर्ट झांसी ले जा रहे थे। दो...
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