वाराणसी, जनवरी 31 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। होटल ताज के ज्ञान गंगा सभागार में शुक्रवार दोपहर बनारस लिटरेचर फेस्टिवल-4 के मंच पर जब प्रख्यात बांसुरी वादक पं.राजेंद्र प्रसन्ना ने बांसुरी में पहली फूंक मारी तो मानो समय ठहर गया। स्वर, लय और नाद का सुरम्य संधान कर उन्होंने सभागार को क्षणभर में राग-लोक में रूपांतरित कर दिया। उन्होंने वादन का शुभारंभ राग शुद्ध सारंग से किया। बांसुरी पर बहती यह रागधारा कभी एक ताल की गंभीरता में ठहरी, तो कभी द्रुत तीन ताल की चपल चाल में लहराई। स्वरों की यह बुनावट ऐसी थी मानो आकाश में बादल घिर आए हों और काशी की धरती पर सुर-वृष्टि होने लगी हो। पं.राजेंद्र प्रसन्ना ने बनारसी दादरा को बांसुरी पर इस कौशल से साकार किया कि वह केवल सुना नहीं गया, बल्कि महसूस किया गया। बांसुरी की तानों में बनारस की गलियां, घाटों का अतरं...