बगहा, दिसम्बर 14 -- ठकराहा के किसान पिछले कई सालों से एक अनदेखी मुसीबत का सामना कर रहे हैं। बांसी नदी,जो कभी इस क्षेत्र की जीवन रेखा हुआ करती थी। अब इसमें आने वाली बाढ़ से हर साल किसान परेशान व बर्बाद हो रहे हैं। वीरेंद्र तिवारी, निजामुद्दीन अली, जितेंद्र कुशवाहा बताते हैं कि बांसी नदी के जलग्रहण टाल क्षेत्र है। नदी में बाढ़ आने पर खरीफ की फसल धान इत्यादि बर्बाद होती है। जमीन में नमी रहने से रबी फसलों की खेती में बिलंब होती है। ऐसे में रबी फसलों की बुआई ससमय करना संभव नहीं हो रहा है। किसान कहते हैं कि सन 1980 के दशक में बांसी नदी का उत्तरी तटबंध पर जमींदारी बांध था,जो समय के साथ-साथ संरक्षण और सरकारी ध्यान के बिना धीरे-धीरे अवशेष में तब्दील हो गया। इस जमींदारी बांध के न होने से हर साल बांसी नदी की बाढ़ से ठकराहा प्रखंड के धूमनगर, जगीरहा, को...
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