झांसी, अक्टूबर 27 -- झांसी। इंतजार की घड़ियां खत्म होने को हैं। जल्द घर-घर मंडप सजेंगे। ढोल-नगाड़े बजेंगे। बन्ने गवेंगे। दूल्हे घोड़ी चढ़ेंगे तो दुल्हनों की डोली उठेगी। अगले महीने एक नवंबर को देवोत्थान एकादशी के साथ करीब चार महीने से सोए देव जाए जाएंगे। इसी के साथ रानी का शहर झांसी शहनाईयों की जद में होगा। बाजार भी सहालग पर तज उठे हैं। जिला धर्माचार्य महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार अषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी छह जुलाई थी। इसी साथ श्रीहरि विष्णु भगवान श्रीरसागर में योगनिंद्रा में चले गए थे। जिससे चार महीने से विवाह कार्यक्रम थमे रहे। धर्माचार्यों की मानें तो इसे चातुर्मास भी कहा जाता है। भगवान देवउठनी एकादशी पर नींद से जागते हैं। यह दिन शादियों के लिए बेहद शुभ मुहुर्त है। नवंबर से शादियों की बहार है। इसके बाद दिसंबर में काफी शादी-विवाह क...